Monday, March 26, 2012

मैं और मेरा समाज  

आज एक कहानी पढ़ी. एक राहगीर अपने रास्ते जा रहा था. उसने देखा एक बड़ा सा हाथी एक पतली सी डोरी द्वारा एक खूंटी से बंधा खड़ा था. वो कोई भी विरोध या उत्पात नहीं कर रहा था. ये देख कर राहगीर को बड़ा आश्चर्य हुआ. उसने उस हाथी के मालिक से पूछा कि इतनी पतली डोर से हाथी बंधा है तुमने, क्या ये भाग नहीं जाएगा. ये डोरी तोडना तो इसके लिए बहुत ही आसन है. इस बात पर उस हाथी का मालिक हंसा और बोला "नहीं ये नहीं भागेगा, मुझे ये पक्का विश्वाश है!". राहगीर बहुत ही अचम्भे में था. हाथी का मालिक बोला जानते हो ये हाथी जब बहुत छोटा था तब से मैंने इसे इसी डोरी से बांधना शुरू किया था. पहिली बार इसने बहुत कोशिश की इसे तोड़ने की पर उस वक्त ये बहुत छोटा था और ताकत भी कम थी, इसलिए ये उसे तोड़ न सका. उसके बाद भी लम्बे समय तक इसने प्रयास किया पर नहीं तोड़ पाया. फिर उसके बाद हर मान कर इसने प्रयास करना ही बंद कर दिया. तब से ये शारीरिक रूप से तो बढ़ रहा है पर इसकी मानसिक शक्ति बहुत कमजोर हो गयी है. अब इसे ये पतली सी डोर भी बड़ी शक्तिशाली लगती है. इसलिए ये इसी से बंधा रहता है और कोई विरोध नहीं करता. राहगीर की शंका का समाधान हो गया और वो हंस कर आगे बढ़ गया.


ये कहानी जान कर मुझे उस हाथी में और अपने इस दलित समाज में ज्यादा कुछ अंतर समझ में नहीं आया. वर्षो पहिले अपने अधिकारों के हनन और अपनी शक्तियों के दमन का इतना गहरा असर इस पर अब तक है की ये अपनी शक्ति तो नहीं पहिचान पा रहा है. आज जब दलित समाज एक बड़े समुदाय में तब्दील हो चुका है फिर भी ये अपनी शक्ति से अनभिज्ञ है. आज जरूरत है इसे अपनी शक्तियों के सही इस्तेमाल की, जरूरत है उसे सही दिशा देने की और अपने आप को प्रेरित करने की कि अब वो कमजोर नहीं है और उसमे शक्ति है समाज का नेतृत्व करने की. वो भी अपने इस भारत देश की अखंडता और संप्रभुता में बराबर का भागीदार है. 

अपने दलित समाज में अगर मैं ये जाग्रति ला सका तो शायद अपने डाक्टर बाबा साहेब अम्बेडकर जी के उपकारों का कुछ अंश उन्हें वापस दे सकूं. ये ब्लॉग "दलित जागरण" सिर्फ एक शुरुआत है पर मेरी ये आशा है कि हमारा समाज जल्द ही अपनी सोच में सकारात्मक बदलाव लायेगा और हम ये गर्व से कह सकेंगे कि हाँ हम दलित हैं पर वो दलित जो भारत की विकास के सबसे बड़े भागीदार हैं. ये कल्पना मेरा विश्वाश है और ये तब तक जारी रहेगा जब तक मेरा समाज का एक भी व्यक्ति जीवित है.

                                                                                                                                                                                                   ---------------   डाक्टर बाबा साहेब अम्बेडकर जी का एक अनुयायी

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