Monday, April 16, 2012

14 अप्रैल को रिलिज नहीं हो सकी ‘शूद्र’
समाज में जहर की तरह फैली जाति व्यवस्था के इतिहास और कालांतर में दलित जातियों पर होने वाले जुल्मों-सितम की कहानी कहती फिल्म ‘शूद्र’ 14 अप्रैल को रिलिज नहीं हो सकी. सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म के कई दृश्यों और डायलॉग पर आपत्ति जताने के बाद इसके रिलिज को टाल दिया गया है. अब यह फिल्म सेंसर बोर्ड की निगरानी में है. फिल्म पर गौर करने के लिए एक 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. इस बीच कुछ क्षत्रिय संगठनों द्वारा भी फिल्म का विरोध किए जाने की खबर मिली है. तो कुछ संगठनों द्वारा मोबाइल पर मैसेज भेजकर और फेसबुक पर भी फिल्म का विरोध किया जा रहा है.
 फिल्म के निर्माता-निर्देशक संजीव जयसवाल ने ‘दलित मत’ से बातचीत में कहा कि सेंसर बोर्ड को हमारे फिल्म के कुछ दृश्यों पर आपत्ति है. वह जानना चाहते हैं कि हमने जो दिखाया-बनाया है, उसे कहां से लिया गया है और उसका आधार क्या है. हमने सेंसर बोर्ड द्वारा मांगी गई हर जानकारी को मुहैया करा दिया है. संजीव ने सेंसर बोर्ड के नजरिए को साकारात्मक बताया और उम्मीद जताई कि फिल्म को जल्दी ही अनापत्ति प्रमाण पत्र भी मिल जाएगा. असल में सेंसर बोर्ड इस फिल्म को संवेदनशील मान रहा है. बोर्ड का कहना है कि चूकि फिल्म दो खास वर्गों के बारे में है और एक बड़े समुदाय को प्रभावित करता है इसलिए इसके हर पहलू पर ध्यान देना जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक सेंसर बोर्ड की 12 सदस्यीय कमेटी में हर वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है. दूसरी ओर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ के कोयंबटूर इकाई से भी फिल्म पर आपत्ति जताई गई है. इस संगठन ने फिल्म के निर्माता संजीव जयसवाल सहित कुछ मीडिया ग्रुपों को भी पत्र लिखकर आपत्ति जताई है. 
फिल्म के रिलिज तारीख को रोके जाने के बीच अच्छी खबर यह है कि इस फिल्म के निर्माण का माद्दा दिखाने के लिए 14 अप्रैल को संजीव जयसवाल को मुंबई में आयोजित एक भव्य समारोह में डॉ भीमराव अंबेडकर अवार्ड से सम्मानित किया गया. मुंबई में सायन स्थिति सन्मुक्खानंद हाल में आयोजित समारोह में कई अन्य फ़िल्मी हस्तियों व समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगो को भी सम्मानित किया गया. इन मुख्य हस्तियों में मशहूर अभिनेत्री आशा पारेख, गायक कुमार शानू, गायिका अलका याज्ञनिक, निर्माता निर्देशक संजीव जयसवाल, अभिनेता अन्नू कपूर, चर्चित क्रिकेटर विनोद काम्बली व आई बी एन−7 के पराग छापेकर शामिल थे. संजीव को यह सम्मान बाबा साहब के दिए संदेश को प्रसारित करने और जातिवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे को परदे पर उतारने जैसे साहसिक कदम के लिए दिया गया है. 

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