Friday, May 18, 2012

दलित राजनेता और उनकी कार्य समीक्षा 
आज दलित समाज की आँखें भले ही राजनीती की और इस आस से लगी हों कि उनकी सरकार उनकी जीवन शैली को बेहतर बनाएगी. पर क्या उनके पास इसका कोई मजबूत आधार हैवो किस आधार पर ये सोच सकते है ? क्या केवल राजनेताओ के वादों परनहीं. राजनीती एक दुधारी तलवार है जिससे अगर सही तरीके से दुश्मन पर वार किया जाए तो  विजय दिलाती है और अगर गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो स्वयं को हानि पहुंचा सकती है. मै किसी राजनेता या उनके वादों का विरोध नहीं कर रहा बल्कि अपने दलित समाज को सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि वो समय समय पर राजनीतिज्ञों कि कथनी और करनी का अवलोकन जरूर करते रहें. 
मैं अपने दलित समाज के उन सभी बुद्धिजीविओं से अनुरोध करना चाहूँगा जो समर्थ हैं और जिनका राजनीती से कोई सीधा सरोकार नहीं है, वे सभी अपने अपने अनुभवों के आधार पर इन राजनीतिज्ञों के कार्यों की समीक्षा करें और अपने समाज के साथ उन्हें शेयर करें. हमारे बहुत से साथी जो गरीब हैं और असमर्थ हैं, जिनको राजनीतिज्ञ अपने सस्ते वोट बैंक की तरह इस्तेमाल कर लेते हैं. उनको उनके भले और बुरे के बारे में बताएं. ऐसे दलित भाइयों का ये जानना बहुत जरूरी है कि उनका भला किसमे है.   
आज लगभग हर पार्टी एक दलित नेता चुनाव में खड़ा कर देती है. पर हमें ये जानना बहुत जरूरी है कि वो दलित नेता क्या वाकई दलितों का प्रतिनिधित्व कर रहा है या फिर सिर्फ सत्ता पाने के लिए दलितों के वोट बैंक का इस्तेमाल. भले ही ऐसे नेता हमारे दलित समाज से आते हों पर अगर वो दलितों के हित में काम नहीं करते तो वो सवर्णों से भी ज्यादा खतरनाक हैं, ये वो लोग हैं जो दलितों का मुखौटा पहिन कर दलितों का ही शोषण करते हैं. दलितों के मतों को सवर्णों के हाथों बेंच देते हैं. हमें ऐसे विभीषणों से बचने की जरूरत है. 
इसीलिए मैं कहना चाहता हूँ कि दलित नेता चाहे वो किसी भी पार्टी से खड़े हों उनके कार्यों की समीक्षा करने की बहुत जरूरत है. हर दलित व्यक्ति को ये जानने का अधिकार है की इनका चुना दलित नेता उनके हितों के लिए क्या कर रहा है. ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दलित अभी बहुत ज्यादा पिछड़े हुए हैं, उनको एक बहुत लम्बी दूरी तय करनी है और वो भी बहुत जल्द. अतः मेरा आप सभी दलित भाइयों से ये मेरा सविनय अनुरोध है कि अपने विचारों को एक दूसरे से जरूर बाँटें. ये हमेशा याद रखें कि दलित अमीर हो या गरीब, कहलाता वो दलित ही है. इसलिए अपने हर भाई का सहयोग करें. जितना भी हो सके एक दूसरे को ये अहसास दिलाएं के वो अकेला नहीं है दलितों का पूरा समाज उसके साथ है. ये संघर्ष तब तक जारी रहना  चाहिए जब तक इस वर्ण व्यवस्था का समूल नाश नहीं हो जाता.     ----जय भीम 

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