Monday, June 11, 2012

कैसे करें हम अपने दलित भाइयों की मदद?

आज के इस समय में सभी सक्षम दलित भाई अपने अन्य सभी निर्धन दलित भाइयों की मदद तो करना चाहते हैं, पर कैसे? ये रास्ता उनको पता नहीं होता. नतीजा ये होता है कि वे या तो शांत बैठ जातें हैं या फिर दलित राजनीतिज्ञों को कोसने लगते हैं. जरा आप भी ये सोच कर देखें कि आप भी तो वाकई ये नहीं कर रहे हैं. और अगर कर रहें हैं तो आप भी उन दलितों के साथ हो रहे अन्यायों को अपनी मौन स्वीकृति दे रहे हैं.

क्या दलित समाज का भला सिर्फ राजनीती पर ही निर्भर है. नहीं! पूरी तरह से तो नहीं. क्योंकि समाज का भला सिर्फ समाज के अपने लोग करते हैं जो कार्यकुशल और दृढ इच्छाशक्ति वाले हों. हमें सिर्फ उन दृढ इच्छाशक्ति वाले लोगों को तलाश करना है. आप सभी रोज अपने दिन का कितना समय मनोरंजन में बिता देते हैं? कितना समय सिर्फ ये बातें करने में लगा देते हैं कि राजनीतिज्ञों ने क्या किया और क्या नहीं? बहुत से हमारे दलित व्यापारी जो बहुत सक्षम हैं, उनको भी ये कहते देखा जाता है कि ये सरकार बहुत निकम्मी है, इससे तो बहुत उमीदें थी पर इसने समाज के लिए कुछ भी नहीं किया. पर क्या वे दलित व्यापारी अपने समाज के लिए खुद आगे आते हैं. और अगर आते भी हैं तो उनका प्रथम उद्देश्य राजनीती में प्रवेश पाना और अपनी सम्पदा को बढ़ाना होता है. जो दलित व्यापारी मेरी बात से सहमत नहीं हैं उनसे मैं जानना चाहता हूँ कि उनके क्षेत्र में दलितों की क्या स्थिति है. नौकरी पेशे में वैसे तो बहुत लोग वाकई कुछ सहयोग करने की इच्छा रखते हैं पर वो खुद में ज्यादा सक्षम नहीं होते, इसलिए ये सोच कर शांत बैठ जाते हैं कि ये उनके बस कि बात नहीं है और वो सिर्फ राजनीती के खिलाडियों के चक्रव्योह में ही फंस कर रह जाते हैं.

मेरा अनुरोध उन सभी दलित समाज के लोगों से है कि वे अपने एक जगह एकत्र होने का हर सप्ताह प्रोगाम बनायें और जरूर मिलें बैठे एक दुसरे से ये बातें करें कि हम अपनी तरफ से अपने दलित भाइयों को क्या सहयोग दे सकते हैं. ऐसा हो ही नहीं सकता कि अगर आपके दिल में सहयोग की भावना हो और रास्ते ना मिलें. जिन लोगों का खुद का रोजगार है वो क्या अपने यहाँ दलित समाज के लोगों ज्यादा से ज्यादा नौकरी पर रखने का प्रयास नहीं कर सकते? माना कि आपको पूरी तरह से कार्यकुशल व्यक्ति हमारे समाज में न मिल पायें तो भी क्या हम उनको ट्रेनिंग के द्वारा उस योग्य नहीं बना सकते? बिलकुल बना सकते हैं. बस इच्छाशक्ति और अपने समाज की सेवा भावना की जरूरत है. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ कि भले ही हमारे समाज में लोग बहुत ज्यादा अमीर न हों पर इतने काबिल जरूर हैं कि अगर चाहें तो अपने एक दलित भाई कि मदद तो कर ही सकते हैं.

जो लोग बेरोजगार है पर शिक्षित हैं, वो अपने ज्ञान को निर्धन बच्चों में बाँट सकते हैं. मैं ये नहीं कहता कि सभी ये काम मुफ्त में करें बल्कि ये कहना चाहता हूँ कि दलित भाइयों के बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें, उन्हें सस्ती शिक्षा दें. उनको ये भरोसा दिलाएं कि अगर वो पढेंगे तो उनको अपने रोजगार तलाशने में आसानी होगी. और ये काम कोई एक व्यक्ति नहीं कर सकता. इसके लिए आपको अपने दोस्तों के एक ग्रुप कि आवश्यकता होगी जो इस काम में आपके साथ कदम से कदम मिला कर चल सकें.

   शेष अगले दिन.. 

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