Tuesday, June 12, 2012

कैसे करें हम अपने दलित भाइयों की मदद?                   --- भाग २

दलित समाज की एक और पीड़ा ये है कि इस समाज के लोग जो जब सक्षम हो जाते हैं तो वो पलट कर अपने इस समाज कि सुध नहीं लेते. वो अपने में ही मगन हो जाते हैं. ऐसे लोगों के व्यव्हार को देखने से lलगता है जैसे वो दलित हैं ही नहीं. इसका कारण ये है कि उच्च वर्ग के लोग जब इन सक्षम दलित लोगों को देखते हैं तो वो उच्च वर्गीय लोग उन दलितों को ये अहसास दिलाते हैं कि दलित और उच्च वर्ग का भेद अब रहा ही नहीं. हमारे वो दलित भाई जो कभी उसी उत्पीडन से हो कर गुजर चुके होते हैं वो भी उनके बहकावे में आ जाते हैं और अपने को अन्य दलितों से अलग मानने लगते हैं. वो ये भूल जाते हैं कि जिस एक सीढी को चढ कर वो आगे आ पाए हैं वो उन्ही दलितों के लगातार संघर्ष का परिणाम है.

मेरे कहने का अभिप्राय सिर्फ इतना है कि जैसे हर व्यक्ति के अपने कुछ नैतिक कर्त्तव्य होते हैं जैसे माता पिता के प्रति, अपने भाइयों और बहिनों के प्रति या फिर अपने बच्चों के प्रति, ठीक उसी तरह अपने दलित समाज के प्रति भी हमारे कुछ कर्त्तव्य होते हैं जिनका पालन हमें करना ही चाहिए. जिस तरह अगर हम आगे बढते हैं तो ये चाहते हैं कि हमारे भाई भी उसी तरह प्रगतिशील हों उसी तरह हमें ये भी महसूस करना होगा कि हमारा दलित समाज भी आगे बढे. इतनी लंबी बात कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि हम जब भी अपने दलित भाइयों के साथ बैठें तो अपने दलित समाज के हितों पर चर्चा जरूर करें, क्योंकि चर्चा करने से ही हम एक दुसरे से जुड़ते हैं. चर्चा के माध्यम से वो लोग जो दलितों के हितों के बारें में रूचि नहीं लेते वो भी ये महसूस कर सकेंगे कि आखिर दलित समाज के लोगों का यथार्थ क्या है. उन्ही चर्चाओं कि वजह से ही वो उच्च वर्गीय लोगों की भ्रामक बातों से बच सकेंगे.

जिस तरह से हमारी जिम्मेदारी अपने समाज का भला करना है ठीक उसी तरह से उसके सक्षम लोगों को विभिन्न भ्रामक बातों से बचाना भी हमारी ही जिम्मेदारी बनती है. इसलिए जहाँ तक हो सके अपने हर दलित भाई से चर्चाओं के माध्यम से संपर्क बना कर रखें क्योंकि ये सक्षम भाई हमारे दलित समाज के हीरे और मोती जैसे हैं अर्थात हमारे समाज की ही संपत्ति हैं. इसलिए हमें इनको सहेज कर रखना होगा. अपने समाज के संपन्न दलितों हो समाज से जोड़े रखना भी अपने दलित समाज की सच्ची मदद होगी. सोचें और विचार करें कि आप कितने जागरूक हैं अपने दलित भाइयों कि मदद के लिए. याद रखें चर्चा जरूर करें.                ----जय भीम  

4 comments:

  1. yes, we need to help our society to makeover.......

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  2. We are Dalit and it is our moral duty and responsibility to help our community through money, encouraging, knowledge. If we ignore and keep aside we are loosing a big part of your social responsibility. Coming generation will not spare you...

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  3. We also Help our poorest community persoperson any how

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