Tuesday, June 12, 2012

Caste Hindus raise objection to admission of dalit boys in school
Caste Hindus of Adayur village near Tiruvannamalai opposed the admission of two dalit boys in the local Panchayat Union Middle School on Monday and prevented their children from attending school in protest. The caste Hindu students returned to school in the afternoon after a peace meeting convened by Revenue Divisional Officer (RDO) V. Bupathi, officials said.


Till now, the dalits used to send their children to the Adi Dravidar Welfare Middle School in the village. For the first time, Muthuraj and Sathish, sons of Kumar, a dalit migrant worker, were enrolled in the PUMS in class I and VI on June 6.Taking objection to this, the caste Hindu parents assembled at the school on Monday and urged headmaster Mohammed Usman to expel the dalit boys. He refused.
RDO V. Bupathi, Tahsildar Ravichandran and Police Inspector Pooncholai rushed to the spot and held a meeting with the representatives of both communities. Mr. Bupathi told the meeting that parents alone could decide where their children should study and not others. “When someone comes to a government school for admission, we cannot turn down the request based on caste. Our law does not allow this kind of discrimination in school admission. We need not run two middle schools in the village for less than 400 students. We may consider merging the two schools if things go on like this,” he warned. When some caste Hindu women argued that their girls were teased by dalit boys, Mr. Bupathi said it was irrelevant to the issue at hand and assured them that action would be taken if there was a specific complaint.
M. Srinivasan, a DMDK functionary representing the caste Hindus said, “No dalit has ever been admitted to PUMS and they usually go to their welfare school. This is in practice for 50 years and why should they come here now?” Mr. Bupathi retorted: “Our nation was enslaved for 300 years. Why then did we seek Independence?” Panchayat president R. Ramamurthi, a caste Hindu, argued against the exclusion of the dalit boys. He pointed out that in all other villages in the region, dalit and caste Hindu children studied together in schools. 
“Even children of this village go to school along with dalits from class IX,” he said and urged the parents to send their children to school. Soon, the parents relented.

2 comments:

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    ये कैसा अं‍बेडकरवाद है... ये तो साफ-साफ जातिवाद है...
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    खुद को अंबेडकरवादी कहने वाला सत्‍येंद्र मुरली बाबा साहेब का सबसे बड़ा दुश्‍मन है। मैं तकाकथित दलित चिंतकों से पूछना चाहता हूं कि एक ऐसे कुंठित व्‍यक्ति को जिसे जातीय विद्वैष, धार्मिक उन्‍माद और नफरत फैलाने के सिवाय कुछ नहीं आता सिर्फ इस आधार पर अंबेडकरवादी माना जा सकता है कि उसका जन्‍म एक दलित के घर में हुआ है। क्‍या अं‍बेडकरवादी होने के लिए दलित होना ही एकमात्र योग्‍यता है... मैं उन तथाकथित दलित चिंतकों से पू्छना चाहता हूं कि वे आंख मूंदकर अपराध करने वाले सत्‍येंद्र मुरली का समर्थन क्‍यों कर रहे हैं... सिर्फ इसलिए कि वे दलित हैं... ये कैसा अं‍बेडकरवाद है... ये तो साफ-साफ जातिवाद है... जिसके खात्‍मे के लिए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने ताउम्र संघर्ष किया। बंद कीजिए अंबेडकरवाद के नाम पर यह नौटंकी... बंद कीजिए बाबा साहेब का अपमान... पहले डॉ. अंबेडकर को पढि़ए और उन्‍हें जीवन में उतारने की कोशिश कीजिए... जिस दिन बाबा साहेब के व्‍यक्तित्‍व का एक प्रतिशत भी अपने जीवन में उतार लोगे उस दिन विद्वैष, उन्‍माद और नफरत का नामोनिशान नहीं बचेगा... फिर आप किसी अपराधी सत्‍येंद्र मुरली का यूं आंख मूंदकर समर्थन नहीं करेंगे... सच के साथ खड़े होंगे न कि अपनी जाति के साथ...

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  2. अवधेश भाई! जातिवाद कहीं और से नहीं आया ये यहीं इसी मिटटी कि देन है. जिस नफरत कि बात आप कह रहे हो वो उच्च वर्ग द्वारा ही शुरू हुई है. हम तो सिर्फ प्रतिरोध कर रहें हैं. सतेन्द्र का रवैया भैले ही सही न हो पर उसके द्वारा उठाया गया प्रश्न बेकार नहीं है. गाँधी अ अम्बेडकर कि तुलना को राजनितिक रंग हमने नहीं दिया, इन तुलनाओं को शुरू करने वाले भी सवर्ण कांग्रेसी ही हैं. उन्होंने अपनी अकर्मण्यता को छुपाने के लिए जातिगत प्रतिस्पर्धा बना दी. अगर इस प्रतिस्पर्धा में न पड कर, हम विरोध ना करें तो इसका हमारे समाज में गलत सन्देश जाएगा. सवर्णों द्वारा दलितों को नीचा दिखाने की प्रवृति ही हमारे प्रतिरोध का कारण है. सतेन्द्र युवा है और जोश में कुछ गलती कर बैठा पर उसकी भावनाएं गलत नहीं हैं. जातिगत अपमान को चुपचाप सहते रहना जातिवाद के पेड को पानी देने के सामान है. आशा करता हूँ आप दलितों द्वारा किये जाने वाले विरोध की मजबूरी को समझेंगे. अगर आप वाकई दलितों के हितैषी हैं तो पहिले उन लोगों को रोकिये जो दलितों के महापुरुषों, उनके रीती रिवाजों, उनके पहिनावे, उनके जीवनचर्या पर फब्तियां कसते हैं. अगर आप ऐसा कर सके तो ये प्रतिरोध स्वतः ही समाप्त हो जायेगा. --जय भीम

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